सीएम मोहन का बड़ा ऐलान: एमपी में पहली बार ऑफलाइन होगी टीईटी, डेढ़ लाख शिक्षक देंगे परीक्षा

शिक्षक दिवस पर भोपाल में हुए राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में सीएम ने शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश में पहली बार टीईटी ऑफलाइन भी कराई जाएगी। करीब डेढ़ लाख शिक्षक इस परीक्षा में शामिल होंगे। समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया।

सीएम मोहन का बड़ा ऐलान: एमपी में पहली बार ऑफलाइन होगी टीईटी, डेढ़ लाख शिक्षक देंगे परीक्षा

भोपाल में शिक्षक दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बदलावों को लेकर अहम घोषणा की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश में पहली बार शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) ऑफलाइन भी आयोजित की जाएगी

भोपाल। शिक्षक दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश में पहली बार शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) ऑफलाइन माध्यम से भी आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा में करीब डेढ़ लाख शिक्षक अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल परीक्षा व्यवस्था में बदलाव करना नहीं, बल्कि प्रदेश की पूरी शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण और विद्यार्थीकेंद्रित बनाना है।

आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों के योगदान, सरकारी स्कूलों की स्थिति, विद्यार्थियों के प्रदर्शन और शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे सुधारों पर चर्चा हुई।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहली बार ऑफलाइन होगी TET

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में अब पहली बार TET परीक्षा ऑफलाइन माध्यम से आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लिया गया है। परीक्षा में करीब डेढ़ लाख शिक्षक अभ्यर्थियों के शामिल होने की बात कही गई है।

ऑफलाइन परीक्षा आयोजित किए जाने के फैसले को शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इससे परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर अभ्यर्थियों को शामिल करने की व्यवस्था बनाई जा सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा से जुड़े प्रत्येक स्तर पर आवश्यक बदलाव करने के लिए काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ शिक्षकों के हितों का भी ध्यान रखा जा रहा है। शिक्षकों को बेहतर सुविधाएं, सम्मान और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार लगातार कदम उठा रही है।

शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी प्रदेश के विकास में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। सरकार का प्रयास है कि विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा मिले, जिससे वे बदलती दुनिया की चुनौतियों का सामना कर सकें और अपने सपनों को पूरा कर सकें।

उन्होंने कहा कि केवल स्कूलों की संख्या बढ़ाना या परीक्षाएं आयोजित करना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होना जरूरी है। इसके लिए शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम है। शिक्षक जितने बेहतर तरीके से विद्यार्थियों को तैयार करेंगे, प्रदेश का भविष्य उतना ही मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से विद्यार्थियों के साथ संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित न रखें, बल्कि उनकी प्रतिभा और रुचि को पहचानकर उन्हें सही दिशा देने का प्रयास करें।

सरकारी स्कूलों के परिणाम का दिया उदाहरण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के सरकारी विद्यालयों के शिक्षक पूरी मेहनत और समर्पण के साथ विद्यार्थियों को आगे बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों का उदाहरण देते हुए कहा कि मेरिट सूची में आने वाले विद्यार्थियों में आधे से अधिक विद्यार्थी सरकारी स्कूलों से होते हैं। यह सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की मेहनत और विद्यार्थियों की प्रतिभा का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों की सोच में भी बदलाव आया है। पहले कई अभिभावक निजी स्कूलों को प्राथमिकता देते थे, लेकिन अब सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थी भी उत्कृष्ट परिणाम देकर अपनी क्षमता साबित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार सरकारी स्कूलों में संसाधन बढ़ाने, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

निजी स्कूलों से कम नहीं होंगे सरकारी स्कूल

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूल किसी भी स्थिति में निजी स्कूलों से कम नहीं होंगे। सरकार का संकल्प है कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को भी वही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुविधाएं मिलें, जो बेहतर निजी स्कूलों में उपलब्ध होती हैं।

उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति किसी विद्यार्थी के सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। प्रदेश के हर बच्चे को आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए सरकारी स्कूलों को मजबूत करना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों का सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलना चाहिए। स्कूलों में बेहतर वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और विद्यार्थियों की प्रतिभा को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

शिक्षक सिर्फ पढ़ाएं नहीं, प्रतिभा भी पहचानें

शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक की वास्तविक सफलता तब होती है, जब उसका विद्यार्थी उससे आगे बढ़कर सफलता हासिल करता है।

उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता को पहचानें। हर बच्चा अलग प्रतिभा लेकर आता है। किसी विद्यार्थी की रुचि विज्ञान में हो सकती है, किसी की खेल में, किसी की कला में और किसी की तकनीक या अन्य क्षेत्र में।

ऐसे में शिक्षक का दायित्व है कि वह विद्यार्थी की प्रतिभा को पहचाने और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों को विद्यार्थियों के भीतर छिपी संभावनाओं को सामने लाने का प्रयास करना चाहिए।

‘जहां गुरुर खत्म होता है, वहीं गुरु खड़ा होता है’

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षक की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, “जहां गुरुर खत्म होता है और जहां से गुण शुरू होता है, वहीं गुरु खड़ा होता है।” उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज को दिशा देने का काम करते हैं और उनकी जिम्मेदारी केवल स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक देश के भविष्य का निर्माण करते हैं। देश का नक्शा भले ही कागज पर बनता है, लेकिन देश की किस्मत कक्षाओं में बनती है। इसलिए शिक्षक विद्यार्थियों को केवल विषय का ज्ञान देने के साथ-साथ उन्हें अच्छे नागरिक के रूप में तैयार करने की जिम्मेदारी भी निभाएं।

उत्कृष्ट शिक्षकों का हुआ सम्मान

राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में प्रदेश के उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षकों को सम्मान प्रदान किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षकों के योगदान को पहचान देना और अन्य शिक्षकों को भी बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करना रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक समाज में सम्मान के सबसे बड़े हकदार हैं, क्योंकि वे आने वाली पीढ़ियों को तैयार करते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों के सम्मान और उनकी सुविधाओं को लेकर गंभीर है। शिक्षकों को बेहतर वातावरण मिलने से वे विद्यार्थियों को और बेहतर तरीके से शिक्षित कर सकेंगे।

शिक्षा व्यवस्था में आगे भी जारी रहेंगे बदलाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी। सरकार का प्रयास है कि विद्यार्थियों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले तथा शिक्षकों को भी अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों।

TET को ऑफलाइन कराने की घोषणा इसी व्यापक बदलाव का हिस्सा मानी जा रही है। करीब डेढ़ लाख शिक्षक अभ्यर्थियों की संभावित भागीदारी वाली परीक्षा को लेकर अब परीक्षा व्यवस्था और तैयारियों पर ध्यान दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण का आधार है। इसलिए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने भरोसा जताया कि शिक्षक, विद्यार्थी और सरकार मिलकर मध्य प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। समारोह में शिक्षकों के योगदान को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस समाज में गुरु का सम्मान होता है, वह समाज हमेशा प्रगति की दिशा में आगे बढ़ता है।