गुलाब जल की आड़ में ‘मौत का धंधा’ उरई में बेनकाब, डीआरआई-एटीएस के छापे में करोड़ों की एमडी ड्रग्स जब्त
जालौन के उरई में गुलाब जल बनाने की आड़ में चल रही अवैध MD ड्रग्स फैक्ट्री का DRI और ATS ने भंडाफोड़ किया है। डकोर थाना क्षेत्र के ऐरी रमपुरा गांव में छापेमारी के दौरान 12 किलो से अधिक MD ड्रग्स, मशीनें और केमिकल बरामद किए गए। महाराष्ट्र और हमीरपुर निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के मुंबई और कानपुर से जुड़े तारों की पड़ताल कर रही हैं।
गुलाब जल बनाने के नाम पर चल रही थी अवैध ड्रग्स फैक्ट्री
DRI और ATS की संयुक्त टीम ने तड़के की छापेमारी
12 किलो से अधिक MD ड्रग्स और मशीनें बरामद
महाराष्ट्र और हमीरपुर के दो आरोपी गिरफ्तार
मुंबई और कानपुर तक जुड़े हो सकते हैं नशा तस्करी के तार
स्थानीय पुलिस की जानकारी और निगरानी पर उठे सवाल
उरई (जालौन)। डकोर थाना क्षेत्र के ऐरी रमपुरा गांव में गुलाब जल बनाने की आड़ में चल रहे अवैध सिंथेटिक ड्रग्स के कारोबार का बड़ा भंडाफोड़ हुआ है। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की संयुक्त टीम ने गुरुवार तड़के गांव में स्थित फैक्ट्री पर छापेमारी कर बारह किलोग्राम से अधिक एमडी ड्रग्स बरामद की। मामले में महाराष्ट्र के सांगली निवासी संतोष गवली और हमीरपुर, गोहांद निवासी हेमंत को मौके से गिरफ्तार किया गया है।
जानकारी के अनुसार, छापेमारी में शामिल एटीएस की लगभग 20 सदस्यीय टीम ने गांव के बाहर खेत में बनी फैक्ट्री को घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया। यहां गुलाब जल बनाने के नाम पर संचालित इकाई में एमडी ड्रग्स बनाने की व्यवस्था मिली। मौके से ड्रग्स के अलावा मशीनें, केमिकल और अन्य उपकरण भी बरामद हुए। गिरफ्तार आरोपी हेमंत के घर से भी ड्रग्स बरामद किए जाने की बात कही जा रही है।
एमडी, जिसे मेफेड्रोन या सिंथेटिक उत्तेजक ड्रग कहा जाता है, अत्यंत खतरनाक माना जाता है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अनुसार इसे एम-कैट, म्याऊ म्याऊ और एमडी जैसे नामों से भी जाना जाता है तथा यह एनडीपीएस अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है। बरामद मात्रा को देखते हुए इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपये की कीमत आंकी जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार इस अवैध कारोबार के तार मुंबई और कानपुर से जुड़े हो सकते हैं, जिनकी पुष्टि के लिए आरोपियों से गहन पूछताछ चल रही है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी संतोष और हेमंत की मुलाकात सांगली जेल में हुई थी, जहां से दोनों ने एमडी ड्रग्स बनाने की योजना बनाई। इसके बाद उन्होंने उरई के दूरस्थ गांव में गुलाब जल की फैक्ट्री की आड़ में अवैध लैब स्थापित कर ली। बताया जा रहा है कि यहां से तैयार ड्रग्स की आपूर्ति बड़े शहरों तक की जा रही थी।
इस कार्रवाई ने एक ओर जहां अंतरराज्यीय नशा तस्करी के बढ़ते खतरे को उजागर किया है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के डकोर क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर ड्रग्स निर्माण की गतिविधि चल रही थी, लेकिन स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह स्थिति जांच एजेंसियों की सक्रियता के समान ही पुलिस प्रशासन की चौकसी पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों और ठिकानों पर भी कार्रवाई की जाएगी। बरामद ड्रग्स और आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए लखनऊ ले जाया गया है। प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे अवैध कारखानों को दोबारा संचालित होने का मौका न मिले और नशे के इस खतरनाक धंधे की पूरी जंजीर सामने आए
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस