5 महीने बाद तत्कालीन SDM अरविंद माहौर को हाई कोर्ट से राहत, दुष्कर्म केस में मिली जमानत: 50 हजार के मुचलके पर रिहाई का रास्ता साफ

दुष्कर्म के आरोप में करीब पांच महीने से ग्वालियर सेंट्रल जेल में बंद तत्कालीन SDM अरविंद माहौर को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने जमानत दे दी है। मुरैना की 32 वर्षीय युवती ने शादी का झांसा देकर कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। निचली अदालत से जमानत खारिज होने के बाद हाई कोर्ट ने 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत मंजूर की। इससे उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। इससे पहले सबलगढ़ में महिला से अभद्रता के विवाद के बाद उन्हें निलंबित भी किया गया था।

5 महीने बाद तत्कालीन SDM अरविंद माहौर को हाई कोर्ट से राहत, दुष्कर्म केस में मिली जमानत: 50 हजार के मुचलके पर रिहाई का रास्ता साफ

शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के आरोप में 5 महीने से जेल में बंद तत्कालीन SDM अरविंद माहौर को हाई कोर्ट से बड़ी राहत: 50 हजार रुपये के मुचलके पर मिली जमानत, निचली अदालत से याचिका खारिज होने के बाद पहुंचे थे हाई कोर्ट

मुरैना। दुष्कर्म के गंभीर आरोपों में पिछले पांच महीने से ग्वालियर सेंट्रल जेल में बंद तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर एवं एसडीएम अरविंद माहौर को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने गुरुवार को उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया है। निचली अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद माहौर ने हाई कोर्ट का रुख किया था। अब जमानत मंजूर होने के बाद उनकी जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

यह मामला मुरैना की 32 वर्षीय युवती की शिकायत से जुड़ा है। युवती ने 2 जून 2026 को सिविल लाइन थाने में तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर के खिलाफ शिकायती आवेदन दिया था। शिकायत में युवती ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2025 में फेसबुक के माध्यम से उसकी पहचान अरविंद माहौर से हुई थी। उस समय माहौर सबलगढ़ में एसडीएम के पद पर तैनात थे। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और परिचय नजदीकी संबंधों में बदल गया।

युवती का आरोप है कि अरविंद माहौर ने उससे शादी करने का भरोसा दिलाया और इसी भरोसे पर उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। शिकायत के मुताबिक, माहौर ने शादी का वादा करके उसका विश्वास जीता और अलग-अलग स्थानों पर उसके साथ दुष्कर्म किया। युवती ने आरोप लगाया कि 30 जून 2025 को माहौर उसे घुमाने के बहाने मुरैना ले गए और सर्किट हाउस के पीछे ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उसके साथ सरकारी आवास और ग्वालियर स्थित एक फ्लैट में भी दुष्कर्म किया गया। युवती के मुताबिक, आरोपी ने शादी का भरोसा देकर लंबे समय तक उसका शारीरिक शोषण किया। जब उसने शादी की बात आगे बढ़ाई तो कथित तौर पर माहौर का व्यवहार बदलने लगा।

शादी के बदले पांच लाख रुपये मांगने का भी आरोप

इस मामले में युवती ने अरविंद माहौर पर एक और गंभीर आरोप लगाया था। शिकायत के अनुसार, माहौर ने शादी करने के बदले उससे पांच लाख रुपये की मांग की थी। इतना ही नहीं, युवती ने आरोप लगाया कि उसके सामने एक महीने तक किसी दूसरे युवक के साथ रहने की शर्त भी रखी गई थी। इन आरोपों के बाद मामला और गंभीर हो गया और पुलिस ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई शुरू की।

युवती की शिकायत मिलने के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने अरविंद माहौर के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पहले उन्हें मुरैना सब जेल में रखा गया। करीब डेढ़ महीने बाद उन्हें ग्वालियर सेंट्रल जेल स्थानांतरित कर दिया गया था।

सिविल लाइन थाना प्रभारी उदयभान सिंह यादव के मुताबिक, युवती की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से ही वह न्यायिक हिरासत में जेल में बंद थे।

निचली अदालत से राहत नहीं मिली तो हाई कोर्ट पहुंचे

जेल में बंद अरविंद माहौर ने जमानत पाने के लिए पहले निचली अदालत में याचिका दायर की थी, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में जमानत के लिए याचिका दाखिल की।

मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली। अदालत ने 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद करीब पांच महीने से जेल में बंद तत्कालीन एसडीएम की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, जमानत मिलने का मतलब मामले में आरोपों का समाप्त होना या आरोपी का दोषमुक्त होना नहीं है। मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

सबलगढ़ में महिला से अभद्रता का विवाद भी आया था सामने

अरविंद माहौर का नाम इससे पहले भी एक विवाद को लेकर चर्चा में रहा था। सबलगढ़ में एसडीएम के पद पर तैनाती के दौरान उन पर एक महिला के साथ अभद्र व्यवहार करने और शिकायतकर्ता परिवार को धमकाने के आरोप लगे थे। उस समय इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया था, जिसके बाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर मामला चर्चा का विषय बन गया था।

विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पिछले साल सितंबर में अरविंद माहौर को निलंबित कर दिया था। इस कार्रवाई के बाद भी उनका नाम लगातार चर्चा में बना रहा। अब दुष्कर्म के मामले में पांच महीने जेल में रहने के बाद हाई कोर्ट से जमानत मिलने के कारण वह एक बार फिर सुर्खियों में हैं।

कई विवादों के कारण चर्चा में रहे तत्कालीन अधिकारी

अरविंद माहौर से जुड़े दोनों मामलों ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली और जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े किए थे। एक ओर सबलगढ़ में महिला से अभद्रता और शिकायतकर्ता परिवार को धमकाने के आरोपों को लेकर विवाद हुआ, वहीं दूसरी ओर मुरैना की युवती की शिकायत के बाद दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ।

फिलहाल हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद माहौर को जेल से बाहर आने का कानूनी रास्ता मिल गया है। इस मामले में आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपों की सच्चाई का फैसला अदालत में होगा। युवती की ओर से लगाए गए आरोपों और आरोपी पक्ष के कानूनी बचाव के बीच अब आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी।