उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर के लिए सड़कों पर उतरा हिंदू समाज, संतों ने प्रशासन को दी बड़ी चेतावनी; बोले- प्रतिमा हटाई तो आंदोलन होगा और बड़ा

उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के दौरान खड़े हनुमान मंदिर को स्थानांतरित करने की योजना का विरोध तेज हो गया है. बुधवार को साधु-संतों और सकल हिंदू समाज ने विशाल प्रदर्शन किया. एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर मांग की गई कि मंदिर को उसी स्थान पर रखकर भव्य निर्माण कराया जाए.

उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर के लिए सड़कों पर उतरा हिंदू समाज, संतों ने प्रशासन को दी बड़ी चेतावनी; बोले- प्रतिमा हटाई तो आंदोलन होगा और बड़ा

उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर को लेकर चल रहा आंदोलन बड़ा रूप ले गया। मंदिर के पास हजारों लोग, साधु-संत और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता जुटे। हनुमान चालीसा का पाठ कर प्रतिमा नहीं हटाने की मांग को लेकर SDM को ज्ञापन सौंपा गया।

उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को स्थानांतरित करने की योजना को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को सकल हिंदू समाज, साधु-संतों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर को यथास्थान बनाए रखने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। मंदिर से कंठाल चौराहे तक निकले प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। करीब एक किलोमीटर तक सड़क श्रद्धालुओं की भीड़ से भरी नजर आई। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में भगवा ध्वज लेकर हनुमान चालीसा का पाठ किया और जय श्रीराम के नारे लगाए।

प्रदर्शन में साधु-संतों के साथ महिलाएं, बच्चे और स्थानीय लोग भी शामिल हुए। मंच से संतों ने श्रद्धालुओं को मंदिर और प्रतिमा को यथास्थान बनाए रखने का संकल्प दिलाया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की कि सड़क चौड़ीकरण या अन्य विकास कार्यों के नाम पर खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को दूसरी जगह स्थानांतरित नहीं किया जाए।

मंदिर हटाने की योजना को लेकर बढ़ा विरोध

खड़े हनुमान मंदिर को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा है। सड़क चौड़ीकरण और सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच मंदिर की प्रतिमा को दूसरी जगह स्थापित करने की योजना सामने आने के बाद हिंदू संगठनों और संत समाज ने इसका विरोध शुरू किया था। इससे पहले भी मंदिर के आसपास प्रदर्शन, धरना और चक्काजाम जैसी स्थिति बन चुकी है।

मंदिर की प्राचीनता को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में करीब 170 से 200 वर्ष पुराने होने का उल्लेख किया गया है। प्रतिमा को स्थानांतरित करने के प्रयासों को लेकर भी विवाद सामने आया है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि प्रतिमा को हटाने के प्रयास सफल नहीं हुए, जबकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में अलग स्थिति बताई गई है। एसडीएम ने कहा था कि प्रशासन ने प्रतिमा को हटाने की कोशिश नहीं की। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दावों और प्रशासनिक पक्ष के बीच अंतर भी सामने आया है।

‘यहीं बने भव्य मंदिर’, प्रदर्शनकारियों की मांग

प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि खड़े हनुमान मंदिर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। ऐसे में प्रतिमा को स्थानांतरित करने के बजाय उसी स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया जाना चाहिए।

विश्व हिंदू परिषद से जुड़े महेश आंजना ने कहा कि पिछले करीब 15 से 17 दिनों से प्रतिमा को हटाने की योजना को लेकर चर्चा चल रही है। हिंदू समाज प्रतिमा को किसी भी कीमत पर हटाए जाने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि समाज की मांग नहीं मानी गई तो संतों के नेतृत्व में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

उन्होंने अगली बार बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने की चेतावनी भी दी। प्रदर्शन के दौरान इसी मुद्दे को लेकर संतों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी दर्ज कराई।

हनुमान चालीसा और जय श्रीराम के नारों से गूंजा मार्ग

बुधवार को हुए प्रदर्शन के दौरान धार्मिक माहौल नजर आया। श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा का पाठ किया। हाथों में भगवा ध्वज लेकर लोग मंदिर से कंठाल चौराहे की ओर बढ़े। रास्ते में जय श्रीराम और हनुमान जी के जयकारे लगाए गए।

प्रदर्शन में महिलाओं और बच्चों की भी मौजूदगी रही। संतों ने मंच से लोगों को संबोधित करते हुए मंदिर की धार्मिक मान्यता और आस्था से जुड़े विषयों को सामने रखा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन धार्मिक आस्था से जुड़े स्थल के संबंध में निर्णय लेते समय श्रद्धालुओं की भावनाओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

पुजारी महासंघ ने भी रखी मंदिर बचाने की मांग

खड़े हनुमान मंदिर को लेकर महाकाल मंदिर के पुजारी और अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश गुरु ने भी समाज की भावनाएं प्रशासन तक पहुंचाईं। उन्होंने मंदिर और प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने की मांग की।

इस मामले में इससे पहले भी अलग-अलग संतों, पुजारियों और हिंदू संगठनों की ओर से प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग सामने आती रही है। हाल के दिनों में मंदिर को लेकर हस्ताक्षर अभियान और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं।

एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद साधु-संतों और समाज के प्रतिनिधियों ने एसडीएम एलेन गर्ग को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन बाबा महाकालेश्वर के नाम सौंपा गया। इसमें मांग की गई कि सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया के दौरान खड़े हनुमान मंदिर को दूसरी जगह स्थानांतरित न किया जाए और उसी स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया जाए।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाली आसपास की अन्य संरचनाओं को हटाया जा चुका है, लेकिन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने का समाज विरोध करता रहेगा।

प्रशासन ने प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की थी, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।

प्रशासन ने दिया आश्वासन

ज्ञापन लेने के बाद एसडीएम एलेन गर्ग ने समाज के प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांग को मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मामले में जो भी निर्णय होगा, उसकी जानकारी दी जाएगी।

प्रशासन की ओर से पहले भी कहा गया है कि इस मामले में सभी पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा और श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखा जाएगा।

अब फैसले पर टिकी नजर

खड़े हनुमान मंदिर को लेकर उज्जैन में विरोध का सिलसिला पिछले कई दिनों से जारी है। पहले मंदिर परिसर में धार्मिक आयोजन और हस्ताक्षर अभियान हुए, इसके बाद प्रदर्शन और चक्काजाम की स्थिति भी बनी। अब बुधवार को एक बार फिर बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन को और बड़ा करने की चेतावनी दी है। यदि प्रशासनिक स्तर पर मंदिर को यथास्थान रखने को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं होता है, तो आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन तेज होने की संभावना है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से अंतिम निर्णय का इंतजार है। एक तरफ सिंहस्थ 2028 को देखते हुए सड़क और यातायात व्यवस्था से जुड़े विकास कार्य चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर खड़े हनुमान मंदिर को लेकर धार्मिक आस्था का मुद्दा सामने है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन किस तरह दोनों पक्षों के बीच समाधान निकालता है, इस पर उज्जैन ही नहीं बल्कि प्रदेशभर की नजर बनी हुई है।