114 साल का इंतजार खत्म! CM मोहन ने बुंदेलखंड के जंगल में छोड़े ‘व्योम-नीरा’, MP को मिला तीसरा चीता ठिकाना; अगले महीने आएंगे 2 और
अधिकारियों को उम्मीद है कि चीतों की मौजूदगी से सागर और बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को गति मिलेगी।
मोहन यादव ने कहा कि 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट शुरू हुआ था और अब राज्य में चीतों की संख्या 60 हो गई है.
114 साल बाद बुंदेलखंड की धरती पर लौटा चीता: वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व बना MP का तीसरा चीता आशियाना, CM मोहन ने ‘व्योम-नीरा’ को जंगल में किया रिलीज; अगले माह आएंगे 2 और चीते
सागर। बुंदेलखंड की धरती ने बुधवार को वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। करीब 114 साल के लंबे अंतराल के बाद बुंदेलखंड के जंगलों में एक बार फिर चीतों की दहाड़ और रफ्तार लौट आई। मध्यप्रदेश के सागर जिले में स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व अब राज्य का तीसरा ऐसा क्षेत्र बन गया है, जहां चीतों को बसाने की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बोत्सवाना से लाए गए नर चीते थोलो और मादा चीता CCB-3 को रिजर्व के जंगल में रिलीज किया। जंगल में पहुंचने के बाद दोनों चीतों को अब नए नाम ‘व्योम’ और ‘नीरा’ दिए गए हैं।
चीतों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने के साथ ही बुंदेलखंड में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन की संभावनाओं को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इससे पहले मध्यप्रदेश में कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में चीता पुनर्स्थापना की जा चुकी है। अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व इस अभियान का तीसरा महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।
114 साल बाद ऐतिहासिक वापसी
बुंदेलखंड में चीतों की वापसी को ऐतिहासिक इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इस क्षेत्र में लंबे समय से चीते दिखाई नहीं दिए थे। करीब 114 साल बाद जब ‘व्योम’ और ‘नीरा’ ने नए जंगल में कदम रखा तो वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए यह महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
चीतों को ऐसे क्षेत्र में बसाने की तैयारी लंबे समय से चल रही थी। उनके लिए उपयुक्त प्राकृतिक वातावरण, पर्याप्त शिकार आधार और सुरक्षित वन क्षेत्र तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया। अब दोनों चीतों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी और उनके नए आवास में अनुकूलन की प्रक्रिया का अध्ययन किया जाएगा।
MP में चीतों का तीसरा ठिकाना
मध्यप्रदेश देश में चीता पुनर्स्थापना अभियान का प्रमुख केंद्र बन चुका है। वर्ष 2022 में कूनो नेशनल पार्क से शुरू हुई चीता परियोजना अब धीरे-धीरे दूसरे वन क्षेत्रों तक पहुंच रही है। कूनो के बाद गांधी सागर और अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को इस अभियान से जोड़ा गया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की प्राकृतिक परिस्थितियां वन्यजीवों के लिए बेहद अनुकूल हैं। उनके मुताबिक वर्ष 2022 में 20 चीतों के साथ शुरू हुआ अभियान अब करीब 60 चीतों की आबादी तक पहुंच चुका है। सरकार का लक्ष्य केवल चीतों को लाना नहीं, बल्कि उनके लिए ऐसा मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां वे प्राकृतिक तरीके से रह और प्रजनन कर सकें।
‘व्योम’ और ‘नीरा’ अब बुंदेलखंड की पहचान
बोत्सवाना से आए दोनों चीतों को अब नए नाम दिए गए हैं। नर चीते का नाम ‘व्योम’ और मादा का नाम ‘नीरा’ रखा गया है। जंगल में रिलीज किए जाने के बाद दोनों को उनके नए वातावरण में स्वतंत्र रूप से घूमने का अवसर दिया गया।
वन विभाग की निगरानी में उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। उनके घूमने का क्षेत्र, भोजन, शिकार की उपलब्धता और प्राकृतिक वातावरण के साथ उनका तालमेल महत्वपूर्ण रहेगा। आने वाले समय में इन दोनों चीतों का व्यवहार इस नए आवास की सफलता का अहम संकेत माना जाएगा।
अगले महीने दो और चीते आने की तैयारी
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीता पुनर्स्थापना अभियान को आगे बढ़ाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। अगले महीने दो और चीतों को यहां लाए जाने की योजना है। इससे रिजर्व में चीतों की संख्या बढ़ेगी और भविष्य में इनके प्रजनन की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए यह प्रयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में चीतों को बसाने से उनके व्यवहार और अनुकूलन को समझने का अवसर मिलेगा।
CM बोले- वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चीतों को जंगल में रिलीज करने को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि चीतों को उनके अनुकूल प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक मध्यप्रदेश की धरती वन्यजीवों के लिए अनुकूल है और राज्य में वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। चीतों की मौजूदगी से जंगल सफारी और वन्यजीव पर्यटन को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय ग्रामीणों को भी मिलेगा फायदा
सरकार का फोकस केवल जंगल और वन्यजीवों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभयारण्यों से होने वाली आय में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
बफर क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों को होम-स्टे शुरू करने के लिए 2 से 3 लाख रुपए तक का अनुदान दिए जाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा करना है।
यदि पर्यटकों की संख्या बढ़ती है तो स्थानीय स्तर पर होटल, होम-स्टे, गाइड, वाहन, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं के जरिए ग्रामीणों को आर्थिक लाभ मिल सकता है। इससे वन्यजीव संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
PM मोदी के 25 साल पूरे होने का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान इस अवसर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 सफल वर्षों से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि चीता परियोजना मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में शुरू हुई थी और अब यह अभियान एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मौके को यादगार बनाने के लिए चीतों को बुंदेलखंड की धरती पर रिलीज किया गया है। उनके मुताबिक यह केवल दो चीतों को जंगल में छोड़ने की घटना नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के एक बड़े अभियान का विस्तार है।
‘एशिया से विलुप्त प्रजाति फिर बढ़ रही’
मुख्यमंत्री ने कहा कि एशिया से विलुप्त हो चुकी चीता प्रजाति को दोबारा स्थापित करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने इसे किसी विलुप्त प्रजाति को उसके प्राकृतिक वातावरण में फिर से स्थापित करने का शानदार उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि चीतों की संख्या बढ़ने के साथ मध्यप्रदेश का पूरा इकोसिस्टम भी धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। जंगलों में शिकार प्रजातियों की उपलब्धता, वन क्षेत्र की सुरक्षा और पर्यटन से जुड़े विकास कार्यों को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
बुंदेलखंड में बढ़ेगा वन्यजीव पर्यटन
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की मौजूदगी से बुंदेलखंड के पर्यटन नक्शे पर भी बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। अभी तक यह क्षेत्र ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के लिए जाना जाता रहा है। अब चीता सफारी और वन्यजीव पर्यटन एक नई पहचान बन सकता है।
देश-विदेश से पर्यटकों के आने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीतों का सफलतापूर्वक अनुकूलन होता है और उनकी संख्या आगे बढ़ती है तो बुंदेलखंड में पर्यटन की नई संभावनाएं खुलेंगी।
संरक्षण के साथ बढ़ेगी जिम्मेदारी
चीतों की वापसी जितनी बड़ी उपलब्धि है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी है। उनके सुरक्षित आवास, पर्याप्त भोजन, मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने और प्राकृतिक पर्यावरण को बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी जरूरी होगी।
अब सभी की नजर ‘व्योम’ और ‘नीरा’ की गतिविधियों पर रहेगी। अगले महीने दो और चीतों के आने के बाद यह अभियान और विस्तृत होगा। अगर बुंदेलखंड का यह प्रयोग सफल रहता है तो वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व आने वाले वर्षों में भारत के चीता संरक्षण अभियान का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
इस तरह 114 साल बाद बुंदेलखंड की धरती पर चीतों की वापसी सिर्फ वन्यजीवों की वापसी नहीं, बल्कि इस पूरे क्षेत्र में संरक्षण, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नए दौर की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस